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माहिर कोयल hindikavita रंग लगाना ना सखी ग़ांव के बीच लिबास का मारवाड़ी गोरे उजाले सफ़ेद दुःख रंग बदलते लोग यहाँ काले शहर देवदास कागले हिन्दीकविता भेद

Hindi काले रंग Poems